चिड़िया
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मंगलवार, 29 नवंबर 2016
ना जाने क्यों...
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ना जाने क्यों ? ना जाने क्यों, खिंचा चला आता है कोई.... ना है सूरत का पता, और ना ही सीरत का, कोई जान ना पहचान, पर अहसान मानता है क...
रविवार, 27 नवंबर 2016
साँझ - बेला
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साँझ - बेला विदा ले रहा दिनकर पंछी सब लौटे घर, तरूवर पर अब उनका मेेला है ! दीप जले हैं घर - घर तुलसी चौरे, मंदिर, अंजुरि भर सुख क...
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मेघ-राग
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मेघ-राग पुरवैय्या मंद-मंद, फूल रहा निशिगंध, चहूँ दिशा उड़े सुगंध, कण-कण महकाए... शीतल बहती बयार, वसुधा की सुन पुकार, मिलन चले हो ...
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