चिड़िया

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सोमवार, 31 अक्टूबर 2016

पापा,आपने कहा था....

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पापा, आपने कहा था.... पापा, आपने कहा था , बिटिया तो चिड़िया होती है... उड़ जाती है एक दिन, अपना नया घर बसाने के लिए । छोड़ जाना होत...
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गुरुवार, 27 अक्टूबर 2016

सिया के राम

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सिया  के राम वनगमन सिया का सबने देखा, अश्रू राम के किसने देखे ? बोले राम, प्रिया तुम बिन जीवन के सब दिन गए अलेखे । भिन्न शरीर हमार...
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दीपावली

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दीपावली आसमाँ ने तारों के दीप जलाए हैं, धरती पर भी मानो सितारे जगमगाए हैं । दीपावली की रात कितनी अनोखी है, आसमाँ और धरती दोनों ...
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Meena sharma
लिखने से अधिक शौक पढ़ने का रहा। ब्लॉग जगत से परिचय होने के बाद अपनी स्वरचित रचनाओं को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से ब्लॉग बनाया। 'अब ना रुकूँगी', 'ओस की बूँदें' (साझा), 'तब गुलमोहर खिलता है' ये तीन कवितासंग्रह प्रकाशित।
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